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जल जीवन मिशन में करोड़ों का कथित घोटाला, कई सरपंचों पर कार्रवाई के बाद बढ़े सवाल

जयपुर/चोमू। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था। लेकिन जयपुर जिले की चोमू तहसील के कई गांवों में इस योजना को लेकर गंभीर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। क्या है कथित घोटाला? ग्रामीणों का आरोप है कि जिन पाइपलाइनों […]

जल जीवन मिशन में करोड़ों का कथित घोटाला, कई सरपंचों पर कार्रवाई के बाद बढ़े सवाल

जयपुर/चोमू। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था। लेकिन जयपुर जिले की चोमू तहसील के कई गांवों में इस योजना को लेकर गंभीर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। क्या है कथित घोटाला? ग्रामीणों का आरोप है कि जिन पाइपलाइनों […]

जयपुर/चोमू। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था। लेकिन जयपुर जिले की चोमू तहसील के कई गांवों में इस योजना को लेकर गंभीर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं।

क्या है कथित घोटाला?

ग्रामीणों का आरोप है कि जिन पाइपलाइनों को गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए बिछाया गया था, उनमें से कई पाइपों का उपयोग कुछ सरपंचों और प्रभावशाली लोगों ने अपने निजी ट्यूबवेलों, खेतों और कृषि कार्यों के लिए कर लिया। आरोप है कि सरकारी धन से खरीदे गए और जनता के लिए लगाए गए पाइपों को निजी उपयोग में ले जाया गया, जबकि गांवों के अनेक घर आज भी पर्याप्त पेयजल से वंचित हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई बस्तियों में नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है। गर्मी के मौसम में लोग पानी के लिए परेशान हैं, जबकि योजना के संसाधनों का लाभ कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रह गया।

जांच और ऑडिट के दौरान यह भी सामने आया कि कई स्थानों पर पाइपलाइन बिछाने के कार्य को लेकर केवल औपचारिकताएं पूरी की गईं। ग्रामीणों के अनुसार पाइपलाइन बिछाने के दौरान फोटो और दस्तावेजी रिकॉर्ड तो तैयार किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कई जगहों पर कार्य अधूरा या मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया।

ऑडिट में कथित तौर पर यह पाया गया कि जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह संचालित दिखाई गई थी, वहां कई गांवों में लोगों को अपेक्षित जल आपूर्ति नहीं मिल रही थी। जांच में यह भी सामने आया कि सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर था।

मामले की शिकायतें सामने आने के बाद प्रशासन द्वारा जांच शुरू की गई। सूत्रों के अनुसार, जांच में प्रारंभिक स्तर पर कई अनियमितताएं सामने आने के बाद 4 से 5 सरपंचों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कुछ मामलों में वित्तीय गड़बड़ियों और योजना के दुरुपयोग की भी जांच जारी है।

चोमू तहसील के गीदा का बास, घिनोई, गोरी का बास, गुवारड़ी, हबू का बास, हरड़ रामपुरा, हरोटा, हस्तेड़ा, हथनोदा, हीरा का बास, इटावा भोपजी, जैसिंहपुरा नाथावतान, जैतपुरा, जालिम सिंह का बास, जाटनवाली, झीरा, जोधपुरा, कालाडेरा, खेजरोली, कीरत सिंह का बास, किशनपुरा, कुशालपुरा, लालपुरा और लोहारवाड़ा सहित कई गांवों में ग्रामीण इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी योजनाओं के संसाधनों का दुरुपयोग हुआ है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और जनता के लिए बनाई गई जलापूर्ति व्यवस्था को पुनः सुचारु किया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से मांग की है कि पूरे मामले का तकनीकी और वित्तीय ऑडिट कराया जाए, ताकि जल जीवन मिशन का लाभ वास्तव में ग्रामीण जनता तक पहुंच सके और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोका जा सके।